Wednesday, December 17, 2025
क्यों हम इतने मतलबी होते जा रहे हैं ? - बसंत ओझा, लेखक एवं पत्रकार
कभी रात के सन्नाटे में, जब सब सो जाते हैं और सिर्फ़ हमारी यादें जागती हैं, तब यह सवाल हमें अंदर तक हिला देता है — क्या हम सच में बदल गए हैं? या फिर हालात ने हमें ऐसा बना दिया है कि अब दिल से ज़्यादा ज़रूरतें बोलने लगी हैं।
हम लोगों के बीच रहते हैं, बातें भी करते हैं, हँसते भी हैं… लेकिन अंदर कहीं एक खालीपन है। रिश्ते अब दिल से नहीं, ज़रूरत से जुड़े लगते हैं। जब तक काम है, तब तक अपनापन है; जब काम खत्म, तो इंसान भी पीछे छूट जाता है।
हमें याद है, एक समय था जब हम बिना वजह किसी को याद कर लेते थे। बस यह जानने के लिए कि वो ठीक है या नहीं। आज अगर फोन उठता भी है, तो पहले दिमाग पूछता है — “किस काम से?” शायद यही समझदारी है, लेकिन इस समझदारी ने हमें बहुत अकेला कर दिया है।
हम मतलबी पैदा नहीं हुए थे। हमने भी पूरे दिल से भरोसा किया था। हमने अपना समय दिया, अपनी भावनाएँ दीं, खुद को पूरी तरह सामने रखा। बदले में हमें खामोशी मिली, बेरुख़ी मिली, और यह एहसास मिला कि हम बस ज़रूरत भर के थे। हर चोट के बाद हमारा दिल थोड़ा और सख़्त होता गया, और एक दिन हमने खुद से कह लिया — अब बिना मतलब किसी के लिए नहीं पिघलना है।
आज हम देखते हैं — हर कोई अपनी-अपनी लड़ाई में उलझा है। ज़िंदगी की रफ्तार इतनी तेज़ है कि किसी के दर्द के पास बैठने की फुर्सत नहीं। पैसे का डर, भविष्य की चिंता, और टूट जाने का डर… इन सबने मिलकर हमें भी मतलबी बना दिया है।
सबसे ज़्यादा दर्द तब होता है, जब हम जानते हैं कि हमारी बेरुख़ी सामने वाले को तोड़ देगी, फिर भी हम चुप रह जाते हैं। हम जानते हैं कि एक छोटा सा हालचाल किसी को संभाल सकता है, फिर भी हम उसे टाल देते हैं। क्योंकि अब दिल से ज़्यादा दिमाग चलता है, और दिमाग सिर्फ़ अपना बचाव करना जानता है।
फिर भी… हम मानते हैं कि सब कुछ खत्म नहीं हुआ है। आज भी कुछ लोग हैं जो बिना स्वार्थ साथ खड़े रहते हैं। जो इसलिए पूछते हैं क्योंकि उन्हें सच में फर्क पड़ता है। जो बिना बोले भी दर्द समझ लेते हैं। शायद ऐसे लोग कम हैं, इसलिए आसानी से दिखते नहीं।
अगर हम इस बदलती दुनिया में थोड़ा सा भी इंसान बने रह जाएँ — बिना मतलब किसी को याद कर लें, बिना स्वार्थ किसी का हाथ थाम लें, बिना वजह किसी के साथ खड़े हो जाएँ — तो शायद यह दुनिया थोड़ी कम मतलबी हो सके।
क्योंकि आखिर में हमारी पहचान हमारी कामयाबी या दौलत से नहीं होगी, बल्कि उस दिल से होगी जो आज भी किसी और के दर्द पर भारी हो जाता है। और अगर ऐसा दिल अभी हमारे अंदर ज़िंदा है, तो उम्मीद भी ज़िंदा है।
- बसंत ओझा, सम्पादक (लेखक एवं पत्रकार)
Friday, December 23, 2011
Tuesday, June 16, 2009
सारस्वत जगत २३ वें वर्ष में प्रवेश

सारस्वत बन्धुओं के कर कमलों में समर्पित २३ वें वर्ष के प्रवेषाँक पर ÷÷सारस्वत जगत'' गर्व के साथ कह सकता है कि सारस्वतों के दिलों में पहला स्थान हमारा है। यकीनन सामाजिक परिवेश में समाज के प्रत्येक परिवार के दिल में स्थान बनाना कोई आसान कार्य नहीं होता, अपनी सार्थकता एवं उपादेयता के साथ समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जरूरत बन जाने को सही मायने में स्नेह का कीर्तिमान बनाने का इतिहास कायम किया है सारस्वत जगत ने। हमने सारस्वत जगत को कभी व्यवसायिक एवं अर्थ लाभ का साधन नहीं बनाया। सारस्वत जगत की नियमित्तता को बरकरार रखने के लिए समाज से वचनबद्धता निभाते हुए ही आज सारस्वत जन-जन के हर दिल में स्थान बना पाये हैं। सारस्वत जगत ने अपनी निष्ठा को सारस्वत समाज की सेवा के ओतप्रोत रखा है, सारस्वत जगत के प्रत्येक कदम से यह परिलक्षित होता है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक बसे सारस्वतों की कड़ी को जोड़ने का प्रयास सारस्वत जगत की विशेषता रही है। सारस्वत पाठकों के दिलों में पहला स्थान हमारा है, यह कथन बिना किसी प्रमाण के कहना आसान नहीं होता, सारस्वत जगत ने सदैव सारस्वतों की पसन्द के अनुरूप अपने आपको व्यवस्थित रखकर यह स्थापित किया है कि समस्त भारत के सारस्वत ब्राह्मणों की हिन्दी भाषा में प्रकाशित होने वाली एक मात्र मासिक पत्रिका है, जिसके एक लाख से अधिक पाठक है। हालांकि यह बात भी सत्य है कि जो सारस्वत बन्धु सारस्वत जगत नहीं पढ़ते हैं तो भी वे इस पत्रिका की जानकारी अवश्य रखते हैं। सारस्वत जगत के अंकों में पाठकों के समक्ष पेश प्रकाशित समाज की महत्त्वपूर्ण जानकारियों के अलावा विशेषाँकों की विशेष पठनीय सामग्री सदैव सराही गई। सारस्वत जगत का सदैव प्रयास रहा है कि पाठकों को क्या व किस तरह चाहिए, पाठक को प्रमुख आधार माना है।
सारस्वत जगत यह स्पष्ट करता है कि सारस्वतों के विचारों में भले ही विविधता हो लेकिन हम विविधतापूर्ण विचारों का सम्मान करते हैं, इससे भी सर्वोच्च है सारस्वत जगत का लक्ष्य। हमारा मानना है कि सारस्वतों के स्नेह और सारस्वत जगत की नियमित्तता से ही अपने लक्ष्य को प्राप्त किया जाए। सारस्वत जगत ने सारस्वत एकता तथा सारस्वतों के उत्थान को सर्वोपरि माना है, विश्वास रखा है। सारस्वत जगत ने यह सदैव सार्वजनिक किया है कि यह पत्रिका सारस्वत ब्राह्मणों के विचारों की अभिव्यक्ति का स्वस्थ मंच है, इसलिए हम प्रत्येक सारस्वत के योगदान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। समाज को संगठित, संस्कारित और शिक्षित करने के लिए हम और आप मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करने का प्रयास करेंगे जिससे सारस्वतों को संगठित, संस्कारित और शिक्षा के प्रति जागरूक होने का ज्यादा से ज्यादा अवसर मिल सके। सारस्वतों को संगठित, संस्कारित और शिक्षा से ही नई पहचान मिलेगी। यह पहचान दिलाने का नया इतिहास भी सारस्वत बन्धुओं के सहयोग से सारस्वत जगत द्वारा ही रचा जाएगा, इसमें संदेह नहीं। सारस्वत बन्धुओं के मध्य एक विशेष सेतु का कार्य बिना किसी भेदभाव के सब पर समदृष्टि बनाए रखते हुए सारस्वतों के पथ को आलोकित करना ही हमारा ध्येय है। सारस्वत जगत ने न केवल पत्रिका होने का अपना कर्तव्य पूरा किया, बल्कि सारस्वतों का सच्चा साथी बन कर समय-समय पर अपनी प्रकाश की ज्योति से सारस्वत समाज ज्योतिर्मय किया है। हमारा कार्य है समाज की बात समाज तक पहुँचाना है। ÷÷सारस्वत जगत'' विचार-दोहन का कार्य कर रही है। कितना बखूबी वह अपना कर्त्तव्य निभा रही है, इसके निर्णायक आप हैं। जो आपका है वही आपको ही परोसते हैं। यह सभी ने सोचना है कि समाज को किस प्रकार दिशा दिखानी है। इसके लिए समवेत स्वरों से आह्वान करना होगा। हमने सदैव अपने सारस्वत समाज को ही सर्वोपरी समझा है। भविष्य में भी समझेंगे। सारस्वत बन्धुओं का हित ही हमारा हित रहा है, भविष्य में भी हमारे सारस्वत पाठक हमें समय-समय पर बहूमूल्य सुझाव देते रहेगें।
सारस्वत जगत के नियमित प्रकाशन में हमें संरक्षक सदस्यों, विज्ञापनदाताओं, लेखकों, शुभचिन्तकों एवं सहयोगी प्रतिनिधियों ने जो सहयोग दिया वह भी सराहनीय है। भविष्य में इसी प्रकार के पूर्ण सहयोग सम्बन्धों की कामना करते हैं कि सारस्वत जगत नियमित प्रकाशित होकर सदैव आपकी चहेती होने का गौरव प्राप्त करती रहे। इन्हीं शुभकामनाओं के सहित आप सबका,
P.R. Ojha,
Editor Saraswat Jagat
सारस्वत जगत यह स्पष्ट करता है कि सारस्वतों के विचारों में भले ही विविधता हो लेकिन हम विविधतापूर्ण विचारों का सम्मान करते हैं, इससे भी सर्वोच्च है सारस्वत जगत का लक्ष्य। हमारा मानना है कि सारस्वतों के स्नेह और सारस्वत जगत की नियमित्तता से ही अपने लक्ष्य को प्राप्त किया जाए। सारस्वत जगत ने सारस्वत एकता तथा सारस्वतों के उत्थान को सर्वोपरि माना है, विश्वास रखा है। सारस्वत जगत ने यह सदैव सार्वजनिक किया है कि यह पत्रिका सारस्वत ब्राह्मणों के विचारों की अभिव्यक्ति का स्वस्थ मंच है, इसलिए हम प्रत्येक सारस्वत के योगदान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। समाज को संगठित, संस्कारित और शिक्षित करने के लिए हम और आप मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करने का प्रयास करेंगे जिससे सारस्वतों को संगठित, संस्कारित और शिक्षा के प्रति जागरूक होने का ज्यादा से ज्यादा अवसर मिल सके। सारस्वतों को संगठित, संस्कारित और शिक्षा से ही नई पहचान मिलेगी। यह पहचान दिलाने का नया इतिहास भी सारस्वत बन्धुओं के सहयोग से सारस्वत जगत द्वारा ही रचा जाएगा, इसमें संदेह नहीं। सारस्वत बन्धुओं के मध्य एक विशेष सेतु का कार्य बिना किसी भेदभाव के सब पर समदृष्टि बनाए रखते हुए सारस्वतों के पथ को आलोकित करना ही हमारा ध्येय है। सारस्वत जगत ने न केवल पत्रिका होने का अपना कर्तव्य पूरा किया, बल्कि सारस्वतों का सच्चा साथी बन कर समय-समय पर अपनी प्रकाश की ज्योति से सारस्वत समाज ज्योतिर्मय किया है। हमारा कार्य है समाज की बात समाज तक पहुँचाना है। ÷÷सारस्वत जगत'' विचार-दोहन का कार्य कर रही है। कितना बखूबी वह अपना कर्त्तव्य निभा रही है, इसके निर्णायक आप हैं। जो आपका है वही आपको ही परोसते हैं। यह सभी ने सोचना है कि समाज को किस प्रकार दिशा दिखानी है। इसके लिए समवेत स्वरों से आह्वान करना होगा। हमने सदैव अपने सारस्वत समाज को ही सर्वोपरी समझा है। भविष्य में भी समझेंगे। सारस्वत बन्धुओं का हित ही हमारा हित रहा है, भविष्य में भी हमारे सारस्वत पाठक हमें समय-समय पर बहूमूल्य सुझाव देते रहेगें।
सारस्वत जगत के नियमित प्रकाशन में हमें संरक्षक सदस्यों, विज्ञापनदाताओं, लेखकों, शुभचिन्तकों एवं सहयोगी प्रतिनिधियों ने जो सहयोग दिया वह भी सराहनीय है। भविष्य में इसी प्रकार के पूर्ण सहयोग सम्बन्धों की कामना करते हैं कि सारस्वत जगत नियमित प्रकाशित होकर सदैव आपकी चहेती होने का गौरव प्राप्त करती रहे। इन्हीं शुभकामनाओं के सहित आप सबका,
P.R. Ojha,
Editor Saraswat Jagat
Sunday, June 14, 2009
सारस्वत छात्र/छात्राओं के लिए खुश खबरी
सारस्वत समाज के होनहार छात्र/छात्राओं के लिए सारस्वत जगत द्वारा हर वर्ष परीक्षा सत्र के परीक्षा परिणामों में कुल अंकों में से 60 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले होनहार छात्र/छात्राओं का सचित्र संक्षिप्त परिचय प्रतिवर्ष मई के अंक से निःशुल्क प्रकाशित किया जाता है। आठवीं बोर्ड, दसवीं बोर्ड एवं 12 बोर्ड की परीक्षाओं में 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र/छात्राओं को सारस्वत जगत द्वारा ''सारस्वत प्रतिभा अभिनन्दन-पत्र'' दिया जाता।
अतः कक्षा 3 से सीनियर सैकेण्डरी तथा कॉलेज की सभी कक्षाओं के छात्र एवं छात्राएँ निम्न जानकारी के साथ अपना परिचय अलग कागज पर लिखकर प्रेषित करें।
छात्र/छात्रा का नाम.....................................................................................................................................................
जन्मतिथि..........................................उत्तीर्ण कक्षा................................प्राप्तांक...........................प्रतिशत....................
पिता का नाम एवं पूर्ण पता ...................................................................................................................................
....................................................................................................................................................................................
नोट : उपरोक्त जानकारी के साथ अपना पासपोर्ट साईज फोटो एवं परीक्षा परिणाम (मार्कशीट) की फोटो स्टेट प्रति ''सारस्वत जगत'' कार्यालय के पते पर भिजवायें। किसी भी अधूरी जानकारी के अभाव में परिचय प्रकाशित नहीं किया जावेगा।
भेजने के लिए हमारा पता :
सारस्वत जगत
ललकार डाकघर के पीछे
सारस्वत मार्ग, गंगाशहर रोड
बीकानेर-334001 (राजस्थान)
For more detail Call on : 9460127348, 9352613637
अतः कक्षा 3 से सीनियर सैकेण्डरी तथा कॉलेज की सभी कक्षाओं के छात्र एवं छात्राएँ निम्न जानकारी के साथ अपना परिचय अलग कागज पर लिखकर प्रेषित करें।
छात्र/छात्रा का नाम.....................................................................................................................................................
जन्मतिथि..........................................उत्तीर्ण कक्षा................................प्राप्तांक...........................प्रतिशत....................
पिता का नाम एवं पूर्ण पता ...................................................................................................................................
....................................................................................................................................................................................
नोट : उपरोक्त जानकारी के साथ अपना पासपोर्ट साईज फोटो एवं परीक्षा परिणाम (मार्कशीट) की फोटो स्टेट प्रति ''सारस्वत जगत'' कार्यालय के पते पर भिजवायें। किसी भी अधूरी जानकारी के अभाव में परिचय प्रकाशित नहीं किया जावेगा।
भेजने के लिए हमारा पता :
सारस्वत जगत
ललकार डाकघर के पीछे
सारस्वत मार्ग, गंगाशहर रोड
बीकानेर-334001 (राजस्थान)
For more detail Call on : 9460127348, 9352613637
जीवन परिचय भेजें
सारस्वत जगत का प्रकाशन-उद्देश्य जहाँ सारस्वत समाज की विभूतियों का परिचय समाज को करवाना है, वहीं कुरीतियों और कुप्रथाओं को भी भग्न करना है। हमारे लिए यह जानना गौरव की बात ही होगी कि सारस्वतों में भी कितने ही रत्न हैं ? हम ऐसे सारस्वत रत्नों से आपका साक्षात्कार करवायेंगे। आप भी हमें ऐसे व्यक्तियों का जीवन-परिचय (मय चित्र) प्रेषित करें, भले वे ज्ञान, शिक्षा, सेवा, व्यापार, व्यवसाय, उद्यम आदि किसी क्षेत्र में क्यों न हों। ऐसे अलभ्य प्रत्येक समाज का गौरव एवं सिरमोर होते हैं। हमें इस घातक प्रवृति का परित्याग करना ही होगा कि हम राष्ट्र के अन्य समाजों से किसी भी रूप में पिछड़े हुए हैं। हमें किसी प्रकार के हीन-बोध को हमारे अन्तःकरण में प्रविष्ट नहीं होने देना है, हमें सदैव अपना अतीत स्मरण करना है और अपने को, अपने बन्धु-बान्धवों को तथा अपने समाज को प्रत्येक क्षेत्र में प्रोन्नत करके अपना मस्तक गर्वोन्नत करने की उच्चाकांक्षा मन में रखनी है। आप द्वारा प्रेषित समाज के ''सारस्वत रत्न'' का जीवन परिचय प्राप्त होने पर हम सहर्ष प्रकाशित करेंगे।
भेजने के लिए हमारा पता :
सारस्वत जगत
ललकार डाकघर के पीछे
सारस्वत मार्ग, गंगाशहर रोड
बीकानेर-334001 (राजस्थान)
भेजने के लिए हमारा पता :
सारस्वत जगत
ललकार डाकघर के पीछे
सारस्वत मार्ग, गंगाशहर रोड
बीकानेर-334001 (राजस्थान)
Subscribe to:
Comments (Atom)



